भारत सरकार द्वारा शुरू की गई Smart City Mission एक क्रांतिकारी पहल है जिसका उद्देश्य देशभर में नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना और आर्थिक विकास को गति देना है। आज जब भारत की लगभग 31% जनसंख्या शहरों में रहती है और GDP में 63% योगदान देती है, तो यह ज़रूरी हो गया है कि शहरी क्षेत्रों में भौतिक, सामाजिक और तकनीकी ढांचे को मज़बूत किया जाए। अनुमान है कि 2030 तक शहरी आबादी 40% तक पहुँच जाएगी और GDP में 75% योगदान देगी।
स्मार्ट सिटी मिशन का उद्देश्य
यह योजना न सिर्फ़ बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर केंद्रित है, बल्कि तकनीक की मदद से जीवन को आसान और सुरक्षित बनाने की दिशा में काम करती है। इस मिशन में मुख्य रूप से निम्नलिखित बातों पर ज़ोर दिया गया है:
- स्थानीय विकास को बढ़ावा देना
- डिजिटल टेक्नोलॉजी और IT का उपयोग
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP मॉडल)
- लोगों की भागीदारी और ई-गवर्नेंस
क्या है स्मार्ट सिटी?
स्मार्ट सिटी का मकसद नागरिकों की ज़रूरतों को प्राथमिकता देना है। यह मिशन उन शहरों को बढ़ावा देता है जहां:
- मूलभूत सुविधाएं (पानी, बिजली, साफ़-सफ़ाई आदि) बेहतर हों
- नागरिकों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण जीवन मिले
- स्मार्ट समाधानों (जैसे ई-गवर्नेंस, डिजिटल कनेक्टिविटी) का प्रयोग हो
- पर्यावरण साफ़ और टिकाऊ हो
स्मार्ट सिटी की रणनीति
इस मिशन में विकास को तीन स्तरों में बांटा गया है:
- रेट्रोफिटिंग – मौजूदा शहर के इलाकों को स्मार्ट बनाना
- पुनर्विकास (Redevelopment) – पुराने इलाकों को पूरी तरह नया रूप देना
- हरित क्षेत्र (Greenfield) – नए स्मार्ट शहर बसाना
इसके अलावा, हर शहर में कम से कम एक स्मार्ट समाधान को पूरे शहर में लागू किया जाएगा।
कोर सुविधाएं जो स्मार्ट सिटी में मिलेंगी
- पर्याप्त पानी और बिजली की सप्लाई
- स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
- कुशल ट्रांसपोर्ट सिस्टम
- किफायती आवास, खासकर गरीबों के लिए
- मजबूत IT कनेक्टिविटी
- ई-गवर्नेंस और नागरिक भागीदारी
- महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों की सुरक्षा
- बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था
कवरेज और समयावधि
इस योजना के तहत 100 शहरों को शामिल किया गया है और इसकी समयावधि 5 साल (2015-16 से 2019-20) रखी गई थी। इसके बाद योजना की समीक्षा कर आगे बढ़ाया जा सकता है।
स्मार्ट सिटी के लिए राज्यवार वितरण
हर राज्य/संघ राज्य क्षेत्र को उनकी शहरी जनसंख्या और वैधानिक शहरों की संख्या के आधार पर समान मापदंडों से स्मार्ट सिटी आवंटित किए गए हैं। हर राज्य को कम से कम एक स्मार्ट सिटी मिली है।
फंडिंग कैसे होती है?
यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसमें केंद्र सरकार द्वारा 5 साल में ₹48,000 करोड़, यानी हर शहर को ₹100 करोड़ प्रतिवर्ष दिए जाते हैं। राज्य सरकारें या स्थानीय निकाय भी समान राशि का योगदान करते हैं। कुल मिलाकर ₹1 लाख करोड़ की राशि इस मिशन के लिए निर्धारित की गई है।
यह एक प्रतियोगिता है जिसमें नगर निकाय अपने स्मार्ट प्रस्ताव प्रस्तुत करते हैं। पहले चरण में 100 शहरों को शामिल किया गया, जिनमें से बेहतरीन योजनाओं को केंद्र सरकार से फंड प्राप्त होता है।
Q1. कितने शहर इस योजना के अंतर्गत आते हैं?
उत्तर: इस मिशन में कुल 100 शहरों को शामिल किया गया है, जो पूरे भारत के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से हैं।
Q2. स्मार्ट सिटी में क्या सुविधाएं मिलती हैं?
उत्तर: स्मार्ट सिटी में पानी-बिजली की सुनिश्चित आपूर्ति, बेहतर ट्रांसपोर्ट, सफाई, किफायती आवास, IT कनेक्टिविटी, ई-गवर्नेंस, पर्यावरण संरक्षण और नागरिकों की सुरक्षा जैसी सुविधाएं शामिल होती हैं।
Smart Yojna सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि भारत के भविष्य को संवारने का प्रयास है। यह शहरों को तकनीक, सुविधा, सुरक्षा और स्वच्छता के साथ भविष्य की ओर ले जाने का एक सशक्त कदम है।
